बाकी पार्टियों की तरह बहुजन समाज पार्टी भी चल पड़ी परिवारवाद की राह पर
लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ उत्तर प्रदेश में गठबंधन का महागठबंधन बनाया था। महागठबंधन से समाजवादी पार्टी को भले ही कोई खास फायदा ना हुआ हो मगर बसपा को एक बार फिर से लोकसभा में प्रतिनिधित्व का मौका मिल गया। 30 जून को मायावती ने बसपा पार्टी की अहम बैठक की। जिसमें उन्होंने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और सीनियर बसपा नेताओं को बुलाया। इस बैठक में मायावती ने कुछ अहम फैसले लिए। उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। वही अपने भतीजे आकाश आनंद को उन्होंने पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक घोषित किया है। लोकसभा नेता के तौर पर उन्होंने दानिश अली को आगे किया है। वही बसपा नेता गिरीश चंद्र को लोकसभा का मुख्य सचेतक बनाया गया है।
बहुजन समाज पार्टी भी चल पड़ी परिवारवाद की राह पर
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भाई और भतीजे को पार्टी के अंदर अहम पद देने के बाद यह जता दिया है कि पार्टी के अंदर उनके अपनों को ज्यादा महत्व दिया जाएगा। बहुजन समाज पार्टी भी बाकी पार्टियों की तरह अब परिवारवाद की बीमारी से बची हुई नहीं रह पाएगी। जनता दल सेकुलर से बसपा में शामिल हुए दानिश अली को भी लोकसभा नेता के तौर पर जिम्मेदारी दी गई है। बैठक में पूरे देश में बसपा का विस्तार करने ,उत्तर प्रदेश में उपचुनाव की तैयारियां करने और बसपा पार्टी का नेतृत्व और मजबूत करने जैसी कई बातों पर भी विचार किया गया। वहीं उत्तर प्रदेश में होने वाले 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को लेकर भी चर्चा की गई।
दरअसल ऐसा माना जा रहा है कि अब उनके भतीजे आकाश आनंद पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने का प्रयास करेंगे। उनके आने के बाद पार्टी में काफी अहम बदलाव किए गए हैं। लखनऊ में हुई मीटिंग से पहले सभी नेताओं से मोबाइल ,पेन, कागज और उनके कार की चाबियां जमा करा ली गई थीं। 18 जून को लखनऊ वापस लौटी मायावती ने लगातार पार्टी गतिविधियों पर मंथन करना शुरू कर दिया है। इस लोकसभा चुनाव में बसपा को 10 सीटें मिली हैं।

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